Monday, May 14, 2012

दर्द

                   Love is Pain Wallpapers

                   दर्द जब हद से गुज़र जाये
     तो क्या कीजे  !!   
     दवा भी कोई काम न आए 
     तो क्या कीजे !!
     दर्द में निकला किया  करती हैं आहें 
     आहें भी सिसक के  थक जाएँ 
     तो क्या कीजे !!


    सुनते थे दुआओं का असर 
    हम दवा के बाद 
    दुआएं भी अनसुना कर जाएँ 
    तो क्या कीजे !!


    हर दर्द होगा आखरी
    ये सोच कर सहा 
    आखरी की हद नज़र न आए 
    तो क्या कीजे !!


    लगता है ज़हर ही है 
    मेरे ग़म की अब दवा 
    वो भी न पी पाए मुझे 
    तो क्या कीजे !!


    थक चुके हैं इतना 
    कि रोने का दम नहीं 
    पर ढीठ  आंसू तब भी आयें  
    तो क्या कीजे !!

    बेखबर बैठे  हैं  
    हरकतों से वो अपनी 
    जान के आईना छुपायें  
    तो क्या कीजे !!      


Saturday, May 12, 2012

माँ


    निर्झर प्रेम-प्रपात बहाती 
    ममता-मेघ घने बरसाती 
    जीवन कंटक चुभ न पायें 
    यह सोच के उर में हमें  छिपाती
    फिर भी जीवन संध्या में 
    जाने  क्यों एकाकी रह जाती !!

    उसकी दृष्टि ताड़ ही लेती 
    मुस्कान के पीछे की व्यथा 
    हंसी की ओट में छिपे हुए 
    मूक अश्रुओं की कथा 
    किन्तु अपने स्वयं के अश्रु 
    हम सबसे क्या खूब छिपाती 
    अपनी जीवन संध्या में 
    जाने क्यों एकाकी रह जाती !!

   सींचा करती जिन फूलों को 
   अपने रक्त के पोषण से 
   वही फूल कंटक बन जाते 
   न लजाते उसके शोषण से 
   फिर भी क्षमाशील ह्रदय से 
   आह कभी न निकल पाती
   अपनी जीवन संध्या में 
   जाने क्यों एकाकी रह जाती !! 

   माँ तेरा उपकार असीमित
   कुछ भी करके चुका न पाऊं !
   बोल है क्या अनमोल जगत में 
   तुझसा, तुझको जो दे पाऊं  ??
   अपना यौवन तुझको दे दूँ 
   जर्जर तन-मन के बदले 
   ऐसा कुछ कानून बनाऊं 
   फिर कभी न कोई तुझे छले !
   
    तू मुझमें , मैं  तुझमें 
    क्यों नहीं परस्पर ढल जाती !
    फिर देखूं जीवन संध्या में 
    कैसे  तू एकाकी रह जाती !!!