Friday, June 8, 2012

सत्यमेव जयते


    


    देखी उड़ान उसकी तो
    क्यों दिल दहल  गये 
    अनगिनत हैं तीर क्यूँ 
     छाती पे चल गये !
    थे मुरीद जाने किस 
    ज़माने से उनके 
    तेवर जो देखे उनके 
    तो हम और मचल गये !
    है हौसला या है जुनूं
    क्यों फेर में पड़िए
    ये देखिये के पत्थरों के
    दिल पिघल गये !
    जाने कशिश थी कैसी
    उसकी सदाओं में 
    खामोश कब से थे जो
    वो पर्वत भी हिल गये !
    था चला अकेला अपनी 
    जानिब-ए-मंज़िल
    अब देखिये तो 
    कितने कारवां में जुड़ गये !
    है चमकता तारा 
    सुनहरे फलक का वो 
    नूर डाला ऐसा
    अँधेरे भी जल गये !
    हैं दुआएं सबके दिलों की 
    उसीके संग 
    बिगड़े रवाज-ओ-रस्म को   
    पल में बदल गये !
    चलते थे बहकी चाल जो 
    कैसे सम्भल गये !
    बेरंग थे जो बुत 
    उसके रंग में रंग गये !!

2 comments:

  1. सत्यमेव जयते:))))

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  2. bilkul sach hai mukesh ji ! bhagwan k ghr der h, andher nhi h .....:))

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