Wednesday, March 27, 2013

'बलात्कार'




  'बलात्कार' 

  आओ दरिन्दों
  मुझे लूटो, खसोटो, नोचो !
  गौर से देखो
  एक नारी हूँ मैं
  ब्रहा द्वारा तैयार
  तुम्हारे ऐशो आराम का सामान,
  तुम्हारी ऐय्याशी का सामान,
  तुम्हारी पाश्विक, घिनौनी औऱ नरपैशाचिक
  जरूरतों को पूरा करने का सामान !
  चिथडे चिथडे कर दो
  वो झूठी अस्मिता
  जो बचपन से मैं
  साथ लेकर जी रही थी !
  दिल दहला देने वाली मर्दानगी दिखा दो
  सारी दुनिया को !
  अरे, मर्द हो !
  कोई मजाक है क्या ?
  ऐसी दुर्गति करदो
  मेरी आत्मा और शरीर की,
  कि पूरी औरत जमात
  सात पीढियों तक काँपे,
  औरत होने के लिये !!
  डरो मत !!
  अधिक कुछ नहीं होगा !
  तुम्हारी तलाश, और कुछ
  सजा के बाद सब ठीक हो जायेगा तुम्हारा,
  धीरे -धीरे !
  मैं शायद न बचूँ
  अपने जऩ्मदाताओं की
  जीवन पर्यन्त यातना देखने,
  और मुझ पर चल रही
  टी वी चैनलों की प्राईम टाईम बहस देखने ....
  और वे तमाम धरने और प्रदर्शन देखने,
  जो इस तुम्हारे क्षणिक सुख से उपजे !!
  पर वो सब बाद की बातें हैं !
  शायद इतनी आबादी में
  सब भूल भी जायें !
  पर तुम तो अपना कर्म करो,
  जिसके लिये तुम्हे
  देवतुल्य पुरुष जीवन मिला है!!
  मर्द बनो !! निडर होकर !!!

  dec.2012

4 comments:

  1. दामिनी की याद दिला दी:-(

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  2. जी ! उसी दुर्घटना से आहत होकर निकली थी यह :((

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  3. Replies
    1. जी, बेहद कटु और मार्मिक... :(

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